Future aur option trade kaise hota hai
कैश मार्केट में बहुत से निवेशकों द्वारा निवेश किया जाता है। इक्विटी खरीदने के लिए। और निवेशक उस बाजार को बहुत अच्छे से जानते भी हैं। किन्तु वह F&O के विषय में सभी नहीं जानते हैं। यह क्या होता है और कैसे काम करता है। तो अब हम Future aur option trade kaise hota hai इसे ठीक तरह से सीखते हैं।
फ्यूचर ट्रेडिंग क्या होती है|F&O trading kya hoti hai in hindi
यह सौदे मुख्य रुप से बेचने वाले और खरीदने वाले के बीच में निकट भविष्य के समय के लिए होते हैं। जोकि एक निश्चित तिथि, मात्रा और भाव पर तैय होते हैं। जिनका कम से कम समय 1 महीना से 2 महीना और अधिकतम 3 माह की समय सीमा के अनुसार किये जाते हैं।
यह सभ सौदे स्टाक एक्स्चेंज की निगरानी में फाईनल होते हैं। फ्यूचर और आप्शन सौदों को केवल इन नामों से जाना जाता है। यह डेरिवेटिव उत्पाद होते हैं। इसलिए इनकी स्वयं की कोई वैल्यू नहीं होती है।
इनकी वैल्यू किसी अन्य कंपनी के स्टाक मूल्य के आधार पर होती है। जिन स्टाक, इन्डैक्स या वस्तु से यह अस्तित्व में होते हैं। उन्ही के हिसाब से इन्हें आने वाले महीने या महीनों में खरीदा और बेचा जाता है।
जैसे कि इस उदाहरण से इसे बहुत अच्छे से समझा जा सकता है- किसी आनलाईन सौपिंग कंपनी से आपने आज मोबाइल फोन खरीदा। जिसका पेमेंट सिर्फ आनलाईन आज ही किया गया।
किन्तु उस मोबाइल फोन के लिए अभी आपको इन्तजार करना है। क्योंकि वह मोबाइल फोन आपको आज ना मिलकर अगले एक हप्ते में मिलेगा। ठीक यही फ्यूचर और आप्शन ट्रेडिंग कहलाती है।
Future aur option trade kaise hota hai in hindi
इसे विस्तार से जानते हैं कि यह कैसे होते हैं।
फ्यूचर ट्रेडिंग कैसे होती है
फ्यूचर के सौदे आगे आने वाले एक से तीन महीने के लिए एक ऐसे मूल्य पर होते हैं। जिस पर खरीदने वाले को लगता है कि इसके भाव ऊपर बडेंगे और बेचने वाले को लगता है कि भाव निचे गिरेंगे।
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जिस महीने के लिए यह सौदे किये गये हैं। उस समय भाव जो भी हों चाहे ऊपर गये हों या निचे गिरे हों। इससे कोई मतलब नहीं होता। सौदा होने पर इन दोनों में से एक को फायदा और दूसरे को नुकसान होना तैय है। जैसे कि-
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खरीदार ने बेचने वाले से K7 कंपनी के 1 लौट जिसमें 1000 हजार शेयर हैं(प्रत्येक कंपनी के फ्यूचर आप्शन की 1 लौट में शेयरों की संख्या अलग अलग हो सकती है) का फ्यूचर 200 रुपये भाव में खरीदा। इस हिसाब से कुल कीमत 1000*200=2 लाख है।
जबकि खरीदार इसका 10-20 प्रतिशत प्रीमियम रेट 40000 हजार देकर सौदा कर सकता है। अब सौदे की समय अवधि तक भाव बढकर 250 रुपये हो गये। तो यह 1000*50=50000 हुआ। उसे कुल लाभ 50000-40000=10000 रुपये का लाभ होगा।
किन्तु यदि भाव 200 रुपये से गिरकर 150 रुपये हो जाता है। उसे इसके पूरा होने पर 50000 रुपये का घाटा हो जायेगा। जबकि उसने 40000 रुपये का पेमेंट किया था।
अब इस स्थिति में अपनी जेब से उसे 10000 रुपये और देने होंगे। इस तरह उसे 40000+10000=50000 रुपये की कुल हानि हो जायेगी।
इसमें लाभ के साथ ही हानि की भी अपार सम्भावनाऐं होती हैं।
Option trading kaise hoti hai
फ्यूचर के सौदों के समान ही आप्शन के सौदे किये जाते हैं। किन्तु इसमें खरीदार के पास इस सौदे से बाहर निकलने का विकल्प होता है। वह इसे पहले खरीद और बेच सकता है। उसमें लगातार बने रहने की बाध्यता नही होती है। वह जब चाहें अपने लाभ व हानि को समझते हुए इस सौदे से बाहर निकल सकतें हैं।
आप्शन में बाजार से लाभ कमाने के लिए सौदे के समय पेमेंट किये गये प्रिमियम मूल्य से जादा ही रेट पर बेचने से लाभ होगा। उससे कम रेट पर बेचने से उसे लौस होगा। क्योंकि बायर ने जो प्रिमियम रेट दिया है। वह प्राफिट और लौस में नहीं जुडेगा। वह वापस नहीं होता है।
यहां इसे इस प्रकार से भी समझा जा सकता है। जैसे कि- खरीदार ने k7 कंपनी का आप्शन ₹200 के भाव में 3 महीने के लिए खरीदा। जिसकी एक लौट 1000 शेयर की है। जिसका मूल्य 200*1000 = ₹200000 का है।
अव वह इसका 20 प्रतिशत प्रिमियम ₹40000 दे कर उसने खरीद लिया। यदि उसका भाव बडकर ₹240 हो जाता है। तो उसे 240-200 =40 रुपये का लाभ हुआ। 40*1000 शेयर की लौट = 40000 रुपये का कुल लाभ हुआ।
किन्तु यदि भाव 200 रुपये से निचे आकर 150 रुपये पर आ जाता है। तो उसे 200-150 = 50 रुपये *1000 शेयर = 50000 रुपये का कुल लौस नजर आ रहा है। जो उसे नही होगा। बायर को केवल सौदे के समय पेमेंट किये गये 40 हजार का ही नुकसान होगा। ना की 50 हजार रुपये का।
यहां बायर को लाभ बहुत अधिक हो सकता है। जबकि हानि सीमित होती है। यह इसकी विशेषता है।
जो एक बहुत आकर्षण का केन्द्र हो सकता है। निवेशकों के लिये। इन सभी सौदों का निपटान उस महीने के अतिंम बृहस्पतिवार को होता है।
F&O में सर्किट कैसे काम करता है
इक्विटी मार्केट की तरह इसमें भी सर्किट लगता है। किन्तु इसमें यह अलग तरह से काम करता है। यहां जब अत्याधिक उतार चडाब की स्थिति होने पर इनमें बार बार 15 मिनट के लिये सर्किट लगाया जाता है।
और ठीक 15 मिनट के बाद पुनः ट्रेडिंग होना आरम्भ हो जाती है। इस कारण से इसमें कोई F&O आइटम इक्विटी ट्रेडिंग की तुलना में अधिकतम 20 प्रतिशत से जादा मात्रा में ऊपर नीचे हो जाता है। जिससे इसमें बडी मात्रा में लाभ और हानि के बहुत अधिक अवसर होते हैं।
जिससे थोडी सी असावधानी से बडा लौस भी हो सकता है। अत: सावधानी से ट्रेड करने से किसी भी बडे नुकसान से बचा जा सकता है। या उसे कम से कम किया जा सकता है। जो ट्रेडिंग रणनीति का एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण भाग है।
Future aur option ke fayde nuksan
- कम प्रिमियम पर 10-20 प्रतिशत फ्यूचर स्टाक सैकडों शेयर की लौट खरीदने का अवसर मिलना। जिससे कम निवेश से अधिक लाभ कमाने का मौका मिलना।
- सर्किट लगने के बाद जल्दी ही फिर से ट्रेडिंग शुरु होना।
- आप्शन में सीमित लौस के साथ अधिकतम लाभ बनाने का अवसर होना।
- फ्यूचर में भुगतान किये गये प्रिमियम से भी अधिक हानि होने की सम्भावना।
- नुकसान का एडजस्टमेंट

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