Share market me trading kya hai शेयर मार्केट में ट्रेडिंग क्या है

अधिकतर लोग शेयर मार्केट में निवेश करते हैं। इसलिए हमें इसके विषय में जादा से जादा जानकारी होना चाहिए। इसी जानकारी के बल से यहां अपने वैल्यू निवेश से अधिकतम रिटर्न कमाया जाता है। इसी आधार पर Share market me trading kya hai इसके विषय में भी हमें और जादा समझ होना जरुरी है।

इसी के साथ स्टाक मार्केट में ट्रेडिंग के विभिन्न प्रकार को विस्तृत रुप से जानते हैं। जो निम्न प्रकार से हैं-

  • लौंग टर्म ट्रेडिंग
  • सौर्ट टर्म ट्रेडिंग
  • इन्ट्राडे ट्रेडिंग
  • सौर्ट सेलिंग
  • प्री ओपनिंग सेशन
  • स्पेशल प्री ओपनिंग सेशन
  • क्लोजिंग सेशन

Share market me Long term trading 

शेयर मार्केट में लौंग टर्म ट्रेडिंग को लम्बी अवधि ट्रेडिंग भी कहते हैं। जैसे कि एक बार शेयर खरीद कर लम्बे समय 10 वर्ष, 15 वर्ष, 20 वर्ष और इससे भी जादा समय के लिए हो सकते हैं। इसे डिलीवरी भी कहा जाता है। 

इस समय के दौरान मार्केट के बडने और गिरने से कोई फर्क नहीं होता है। क्योंकि यह सौदे मार्केट आधारित ना होकर बिजनेस भविष्य की ग्रोथ परफार्मेंस और रिसर्च पर आधारित होते हैं

Short term trading

सौर्ट टर्म ट्रेडिंग लगभग लम्बी अवधि की डिलीवरी के समान ही होती है। किन्तु इसमें केवल यह अन्तर होता है कि यह सौदे अधिकतर एक से पांच वर्ष तक के समय तक ही निवेशक शेयर्स को होलड करके रखते हैं। और फिर बेचकर प्रफिट बुक करके निकल जाते हैं

Share market me Intraday trading

इन्ट्राडे ट्रेडिंग डिलीवरी के ठीक उलट होती है। यह सामान्य ट्रेडिंग सेशन प्रातः 09:15-03:30 IST इण्डियन स्टैंडर्ड टाइम मतलब भारतीय समय के अनुसार केवल कुछ मिनट, एक घण्टा प्राधिकरण दिखने और अधिकतम मार्केट क्लोजिंग तक ही होते हैं

इसमें अनुभव इन्ट्राडे टैकनीकल एनालेसिस के अनुसार ट्रेडर ट्रेडिंग करते हैं। किन्तु इसे अत्यंत ही सावधानी से करना चाहिए। क्योंकि इसमें लाभ और हानि के बराबर के अवसर होते हैं। 

इससे बहुत अधिक लाभ भी कमाया जा सकता है और उसी अनुपात में हानि। ट्रेडर ट्रेडिंग करते करते मार्केट को फोरकास्ट करने लगते हैं। जबकि बाजार को ट्रेडर्स को सरप्राइज करना बहुत जादा पसंद आता है

किन्तु जब भी इन्ट्राडे ट्रेडिंग करें तो अपने डिलीवरी सौदे को इससे बिलकुल ही अलग रखें। इनको मिक्स ना होने दें। इसे एक अलग ट्रेडिंग अकाउंट से के माध्यम से करना ही जादा बेहतर होता है। 

क्योंकि वह पैसे शून्य भी हो जायें तो कोई विशेष असर ना पड़े। और इसमें एक बार पैसे डालने के बाद बार बार से जादा पैसे डालने से बचना चाहिए।

किन्तु इस ट्रेडिंग से निवेशक या ट्रेडर सक्रिय भी रहता है। इसके साथ ही मार्केट से अपडेट भी रहता है। बाजार से अपडेट रहना बहुत ही महत्वपूर्ण भी है। 

और कुछ नया अनुभव सीखने का मौका भी होता है। जो उसके ट्रेड और निवेश जननी में एक विशेषज्ञता लाने में भी सहायक होता है

Stop loss ke sath intraday trading

इन्ट्राडे ट्रेडिंग में अत्यंत ही महत्वपूर्ण है। जैसे पानी की गहराई में लाईफ जैकेट जीवन की सुरक्षा में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है। ठीक वैसे ही स्टौप लौस निवेश को बडे लौस से बचाता है। 
Share market me trading kya hai
शेयर मार्केट में ट्रेडिंग क्या है

इसलिए सभी रिटेल निवेशकों और ट्रेडरों को बडे लौस से सुरक्षित रखने के लिए इसे अपराध आवश्य करके ट्रेडिंग करना चाहिए।

Short selling kya hai

जब बडे इन्वेस्टर, फण्ड हाउस और ट्रेडर यह समझ लेते हैं कि मार्केट क्रैश होने वाला है गिरने वाला है। तो वह शेयर ना होने पर भी उनको उचे प्राइस पर बेचना शुरु कर देते हैं। और जब यह क्लोजिंग के समय तक बडी गिरावट की मार झेल चुका होता है। 

तो वह उन्ही बेचे गये शेयर्स को वापस फीर से कम भाव पर खरीद कर सैटलमेंट कर लेते हैं। जिससे कि वह इन बेचे गये शेयर्स के लिए डिफाल्टर ना हो सकें। और एक्सचेंज के माध्यम से उन्हें ब्लैक लिस्ट ना किया जाये

Pre opening session

प्री ओपनिंग सेशन मार्केट खुलने के पहले सुबह 09:00 बजे से शुरु होता है और 15 मिनट यानि सुबह 09:15 बजे बाजार खुलने तक चलता है
यह मुख्यतः तीन तरह से काम करता है। सुबह 09:00-09:08 तक इसमें केवल आडर कलैक्ट, मोडीफाई और कैन्सल किये जाते हैं
और 09:08-09:12 बजे तक इन आडर की मैचिंग करके सभी मैच आडर को पूरा कर दिया जाता है। 

इसी के साथ 09:12-09:15 बजे तक के 3 मिनट को ठीक रिजर्व टाइम के तरह रखा जाता है। जिससे कि आडर एजिक्यूट करने में कोई तकनीकी रुकावट हो जाये तो व्यवस्थित किया जा सके

Special pre opening session

यह स्पेशल प्री ओपनिंग सेशन कुछ विशेष टाइप की इक्विटी के लिए होता है। जैसे कि- IPOs इक्विटी और फिर से लिस्ट Relisted होने वाले शेयर के लिए होता है। जो प्रायः सुबह 09:00-10:00 बजे तक अर्थात 60 मिनट तक चलता है।

इसमें भी 09:00-09:45 बजे तक आडर्स की एन्ट्री, मोडिफीकेशन और कैन्सलेशन का काम चलता है। फिर 09:45-09:55 बजे तक मतलब 10 मिनट में सभी प्राप्त आडर्स का मिलान शुरु होने के साथ ही उनको पूरा कर दिया जाता है। 

और इस सेशन के अंत में 09:55-10:00 बजे तक 05 मिनट का बफर पिरियड होता है। जिसमें ट्रांजेक्शन प्री ओपन से सामान्य मार्केट तक चलता है। 

इस पिरियड में जो भी सौदे कम्पलिट किये जाते हैं। इस सेशन के समय और आईपीओ प्राइस ipo price से जितने भी प्रतिशत प्राइस बडकर या गिरकर स्पेशल प्री ओपनिंग सेशन समाप्त होता है। 

उसी प्राइस पर सामान्य मार्केट में पहली बार ट्रेडिंग के लिए उस शेयर का प्राइस ओपन होता है। फिर उसके बाद जितने पर्सेंट की बडत या गिरावट उसमें होती है। वह इसमें वास्तविक चेंजेस होता है

Closing session

बाजार में सामान्य ट्रेडिंग सुबह 09:15-03:30 बजे तक मार्केट क्लोज होने के बाद भी कुछ सौदों का सैटलमेंट नहीं हो पाता है। तो ऐसे सौदों का निपटान पूरा करने के लिए 03:45 बजे से सायं 04:00 बजे तक का Closing session चलता है। 

जिसमें ऐसे सौदों का निपटान किया जाता है। और इक्विटी प्राइस की फाइनल क्लोजिंग उस Last trade price पर होती है। जिस आधार पर शेयरों की अगले ट्रेडिंग डे के लिए प्री ओपनिंग सेशन के बाद नौर्मल कारोबार के लिए ओपनिंग प्राइस तैयार होती है। 

निवेशक और ट्रेडर में मुख्य अन्तर

इस सभी के साथ यहां निवेशकों और ट्रेनों में मुख्य अन्तर को समझ लेना भी बहुत ही जरुरी है।

Value invester के रुप में

एक वैल्यू इन्वेस्टर किसी भी कम्पनी के शेयरों को ऐसे ही आकर्षित होकर नहीं खरीदता है बल्कि उसके बिजनेस माडल, योजनाओं की सम्भावनाओं, पर्दशन, प्रोडक्ट, सर्विस और क्वालिटी मैनेजमेंट का पूरा एनालेसिस करने के बाद ही। 

सही कम्पनी चुनकर उसके शेयरों को खरीदता है। और उनको धैर्य से लम्बे समय तक बिना किसी मार्केट डर के होल्ड करके रखता है। जिससे वह अपने निवेश से कई गुना सबसे अच्छा रिटर्न प्राप्त करते हैं। और अपनी वैल्थ को बडाकर धनवान बनते जाते हैं।

Trader के रुप में

जबकि ट्रेडर को किसी कम्पनी के बिजनेस माडल, परफार्मेंस, भविष्य की योजनाओं से, प्रोडक्ट व सर्विस से और मैनेजमेंट से कोई मतलब नहीं होता है।

वह केवल कम्पनी के शेयर भाव के मूवमेन्ट, ट्रेन्ड और डेली टैकनीकल चार्ट को और मार्केट भाव देखर शेयरों में ट्रेड करते हैं। और पैसे भी कमाते हैं। 

वह केवल और केरल तुरंत का ही प्राधिकरण बनाने में लगे रहते हैं। जबकि किसी भी सफल इन्वेस्टर ने लम्बे समय में क्वालिटी स्टाक में निवेश करके ही कई गुना लाभ कमाया है।

हम सभी ने आज लेख के माध्यम से यह पूर्ण रुप जाना कि Share market me trading kya hai शेयर मार्केट में ट्रेडिंग क्या है और कैसे कैसे इसे किया जा सकता है। इससे कैसे बेहतर लाभ कमाया जा सकता है