विजयदशमी दशहरा कब और क्यों मनाया जाता है

आईये आज जानते हैं कि विजयदशमी दशहरा कब और क्यों मनाया जाता है दिपावली ठीक बीस दिन पहले आश्विन कुवारे माह के कृष्णा पक्ष की दशमी तिथि को शारदीय नवरात्र  के बाद मनाया जाता है। 

यह लंका में राम और रावण के बीच कई दिनों तक चले घोर संग्राम में राम के माध्यम से रावण पर विजय प्राप्त करने  के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला त्यौहार है। 

रावण और लंका पर रामजी की विजय का यह उत्सव प्रत्येक वर्ष दशमी तिथि  को निरन्तरमनाये जाने के कारण इस तिथि को विजयदशमी कहा जाता है।  और इस नाम से विख्यात  हुई । 

इसी तिथि को ही शेरोवाली माता ने चण्ड मुण्ड नामक दैत्यों का भी संघार किया। इन्ही प्रमुख विजयों के अत्यंत ही महत्व के कारण यह तिथि महा विजयदशमी के रुप में प्रचलित हुई।


विजयदशमी दशहरा पर निबंध व शस्त्र पूजा

इसी कारण से प्रत्येक वर्ष इस माह की दशमी तिथि को रामजी की विजय के उत्सव के रुप में इस आयोजन में रावण जलाया व दहन किया जाता है। 

यह अच्छाई की बुराई पर विश्व की सबसे बडी जीत का प्रतीक है। राम जी ने लंका  में रावण से युद्ध में जाने से पहले इसी दशमी तिथि को प्रातः शस्त्रों की पूजा आयोजन किया गया

और युद्ध में रावण का वध कर सत्य की महा विजय को प्राप्त किया। इसी कारण  इसके साथ मंत्रोच्चारण एवम्ं विधि विधान से शस्त्र पूजा का आयोजन किया जाता है। 

जो यह दर्शाता है अथवा प्रतीक है कि जीवन में मनुष्य को भी इसी प्रकार  समस्त विघ्न वाधाओं पर साहस सदैव से विजय प्राप्त होती रहेगी। ऐसा हम  सबका ढृढ़ भरोसा है

और इसी भरोसा और सकारात्मक ऊर्जा से जीवन में प्रत्येक क्षेत्र में विजय को प्राप्त करते हुए सदैव सदमार्ग पर बनते रहेंगे


विजयदशमी का महत्व

इसकी तैयारियां लगभग महा भर पहले ही आरम्भ हो जाती हैं। दशहरे को समस्त भारत में बड़ी ही धुम धाम और हर्षो ल्लास से मनाया जाता है।

अपितु भारत के साथ विश्व भर में इसे अनेका अनेक प्रकार से वहां की परम्परा और संस्कृति के अनुसार मनाया जाता है

इसके महत्व को स्पष्ट रुप से इसी से समझा जा सकता है कि रामलीला मंचन महीने भर पहले ही आरम्भ हो जाता है। 

जिसमें एक एक घटनाओं का मंच के माध्यम से दर्शकों के समक्ष प्रस्तुतिकरण किया जाता है

जिसे लोग नियमित रुप से बहुत ही प्रसन्नता भाव से देखते हैं। जिसका समापन विजयदशमी के दिन रावण दहन के साथ समपन्न होता है

इण्डोनेशिया में तो इसे अत्यंत ही उत्साह  से भारत के समान ही महत्व और  हर्षोल्लास के साथ जीवन में आदर्श के रुप में प्रसन्न मनोभावों से मनाया जाता है। 

जिसे वहां के नागरिक जीवन में अभिन्न भाग के रुप में समाहित करते हैं। और रामायण की प्रत्येक चौपाई से और बेहतर इनसान बनने के लिए इसका अध्ययन करते एवम्ं कराते हैं। जबकि वहां की अधिकतम आबादी मुसलिम समुदाय की है। 

फिर भी वह इसे अपनी संस्कृति में  आत्मा के समान समाहित करते हैं।  इसके बिना उनका जीवन ठीक उसी प्रकार से अधूरा है। 


विजयदशमी दशहरा रावण दहन क्या है कब और क्यों मनाया जाता है
विजयदशमी दशहरा रावण दहन 

जैसे कि आत्मा के बिन शरीर का कोई महत्व नहीं होता है। भारत में तो प्रत्येक भारतीय नागरिक का जीवन है रामायण। 

इसलिए इस त्यौहार का महत्व अत्यंत ही महत्वपूर्ण है। क्योंकि भारतवर्ष में यह जीवन का आधार है।

जीवन के लिए सबसे बड़ी महत्वपूर्ण प्रेरणा

यह विजय विश्व में एक आदर्श है। और यह अध्ययन एवम्ं शोध का विषय है। विश्व में अचर्ज से भरे सबसे अनोखे निर्माण के सफलतापूर्वक समपन्न होने की विजय का है। 

क्योंकि इसमें लंका पहुचकर रावण से युद्ध में विजय की सबसे बडी वाधा बीच मार्ग में विशाल समुद्र था। 

जिसे पार करके ही वहां पहुचा जा सकता था। जो एक असम्भव सा दिखाई पडने वाला कार्य प्रतीत हो रहा था। जो इस महा संग्राम में विजय प्राप्त करने के लिए सबसे पहली और बडी विजय थी।

किन्तु यह कार्य कैसे सम्भव हो। इसके लिए चिन्तन मनन एवम्ं शोध कार्य किया गया। जिसे विश्व की सबसे पहली शोध भी कहा जा सकता है। 

क्योंकि इसी के आधार पर विशाल समुद्र पर एक लम्बे सेतु का सफलतापूर्वक निर्माण कार्य सम्भव किया जा सका।

यह निर्माण आज की विज्ञान और वैज्ञानिकों के लिए शोध का सबसे बड़ा महत्वपूर्ण विषय है। उस समय बड़ी बड़ी मशीनों के अभाव में यह कार्य कैसे सम्भव किया जा सका। 

अथवा उस समय का विज्ञान आज से कही अधिक उन्नत और विकसित था।  यह स्वीकार करना ही पडेगा। जो आज भी सम्भव नहीं है। 

और उस समय आज से भी बड़ी एवम्ं उन्नत तकनीक रही होगी। ऐसा विज्ञान  का मनना हो सकता है। क्योंकि विज्ञान  के आधार पर यह ऐसा तभी सम्भव हो सकता है।  

जब  यह विकसित संसाधन उस समय  भी उपलब्ध रहे होंगे। अन्यथा यह कैसे सम्भव किया जा सकता है।

जिस सेतु निर्माण के साक्ष्य को आज भी सैटेलाइट चित्रों के माध्यम से स्पष्ट रुप से समुद्र के जल में देखा जा सकता है। 

इस अवसर पर इसकी चर्चा अति आवश्यक है। क्योंकि इसके बिना यह अधूरी है। 

यह भारतीयों के जीवन में अत्यंत ही अधिक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। जो उनके जीवन में अभिन्न अंग समान गौरवशाली और प्रभावशाली है।


सत्य की असत्य पर सबसे बड़ी जीत

यह केवल प्रत्येक वर्ष रावण दहन तक सीमित नहीं है। अपितु इस संसार में सत्य की असत्य पर सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण विजय है।  

जो मानव जाति को सदैव बुराई से ना घबराने और उस पर विजय प्राप्त करने  के लिए प्रेरणा प्रदान करती रहेगी। 

यह मानव को स्वयं के प्रति सकारात्मक भावों के बनाये रखने और अटुट भरोसे  के रुप में सदा सदा के लिए साहस प्रदान करने का कार्य करती रहेगी।

इस रावण के अलावा मानव को इसका भी प्रण करना चाहिए कि उनके अन्दर  का बुराई अथवा बुरी आदतों रुपी इस रावण का भी दहन करें। और समाज में व्याप्त बुराइयों रुपी इस रावण को भी मिटाने का ढृढ़तापूर्वक निश्चय  करें। 

जिससे वास्तव में हमारे चारों ओर के अनेका अनेक दशान्न रावणों को  मिटाकर। सुन्दर और सुन्हैरी विजय प्राप्त कर  जीवन में वास्तविक हर्षोल्लास का संचार हो सके।  

और समस्त भूमि के साथ सम्पूर्ण वायु  भी शुद्धता एवम्ं पवित्रता को प्राप्त कर निर्मल व स्वच्छ हो जाये।

तभी हम जीवन और इस संसार में पूर्ण रुप से इस अवसर पर पुतला रुप में रावण दहन का उद्देश्य अपनी सार्थकता को प्राप्त कर सकेगा। और इस प्रकार से हमने यह जाना कि विजयदशमी दशहरा कब और क्यों मनाया जाता है।