हमारी भारतीय राष्ट्रभाषा Humari Bhartiy Rashtr Bhasha

हमारी प्रिय भारतीय राष्ट्रभाषा Bhartiy Rashtr Bhasha जिसके माध्यम से हम सभी अपने अपने विचारों एवम्ं मनोभावों का आदान प्रदान करते हैं। व्यक्त करते हैं। एक दूसरे तक सरलता से पहुंचाते हैं।

इसके बिना हमारा जीवन अधूरा सा है।मानव जाति के लिए सृष्टि का एक ऐसा अनमोल उपहार है। हमें इसका विशेष आदर सम्मान करना चाहिए। हिन्दी भाषा को सर्वाधिक रुप से बोला, समझा और स्वीकार किया जाता है। इसलिए यह हमारी राष्ट्रभाषा के रुप में स्थापित है।

यह इसकी सबसे उचित परिभाषा है। ठीक इसी प्रकार से हिन्दी हमारी  राष्ट्रभाषा है। और इसे ही राष्ट्रभाषा कहते हैं। यही इसका सबसे शुद्ध और स्पष्ट  अर्थ भी होगा।

इसके रुप में हिन्दी एकमात्र ऐसी भाषा है। जिसे समस्त भारतवर्ष मे अधिकतम बोला, समझा और जनसाधारण के द्वारा स्वीकार किया जाता है। 

हालांकि भारत में अनेकों भाषा ओं को बोला एवम्ं पसंद किया जाता है। यहां एक प्रचलित कहावत भी है कि- 'चार कोस पर पानी बदले और पचास कोस  पर वाणी।'वाणी।'

किन्तु फिर भी हमारी प्रिय हिन्दी भाषा को सर्वमान्य रुप से जनमानस के द्वारा स्वीकार किया जाता है।

हिन्दी राष्ट्रभाषा कब बनी Hindi Rashtr Bhasha kab Bni

इसके सर्वव्यापक रुप मान्यता को ध्यान में रखते हुए। सीधी, सरल और स्पष्ट हिन्दी भाषा को संविधान सभा ने 14 सितम्बर 1949 को हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रुप में वैधानिक मान्यता प्रदान की। 

और भारत सरकार ने सरकारी कार्यालयों में कार्य के लिए हिन्दी का उपयोग कर दिया गया। 

साथ ही समपूर्ण देश में इसके माध्यम से दैनिक कार्यो को किया जाना आरम्भ कर दिया गया।
इसलिए प्रति वर्ष 14 सितम्बर को राष्टीय हिन्दी दिवस के रुप में मनाया जाता है।

किन्तु भारतवर्ष में इसका उपयोग प्राचीन काल से ही किया जा रहा है। यह जन- जन की भाषा रही है।

राष्ट्रभाषा का महत्व 

हमारे जीवन में हिन्दी भाषा का विशेष महत्व है। किसी भी राष्ट्र की उन्नति के लिए एक सर्वमान्य भाषा का सबसे महत्वपूर्ण स्थान होता है। 
 
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 हमारी भारतीय राष्ट्रभाषा हिन्दी

जिसके माध्यम से सरकार जन कल्याण कारी कार्यों को धरातल पर करती है। अपनी योजनाओं को सरलता से जनता तक पहुचाती है। 

और उनकी भावों को सरलता से समझ कर आवश्यक गतिविधियों का संचालन करती है।

जब देश की राष्ट्रभाषा जिसे बच्चे से लेकर वृद्ध तक सरलता से समझ सकता है। यदि उसी भाषा में विद्यालयों एवम्ं विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्रदान की जाती है। 

तो विद्यार्थी आसानी से अपने विषय में विशेषज्ञता प्राप्त कर लेते हैं। और उस राष्ट्र के सुन्दर सुनहरे भविष्य का निर्माण करते हैं।

वह जिस भी क्षेत्र में कार्य करते हैं। वह उस कार्य को सबसे बेहतर प्रकार से करते हैं। किसी को भी उनकी योजना स्पष्ट रुप से समझी और समझाई जा सकती है। 

जिससे प्रत्येक अपनी कार्य क्षमताओं का बेहतर प्रदर्शन कर पाता है। जिस कारण सबसे अच्छा प्रतिफल प्राप्त करता है।

यह हमारी सभ्यता, संस्कृति और विकास की आधारभूत आवश्यकता भी होती है।
जिससे कोई भी देश अपने जनसमूह की कार्य क्षमताओं का पूर्ण रुप से उपयोग राष्ट्र के कल्याण के लिए कर सकता है।


और प्रत्येक नागरिक के भविष्य को सुरक्षित एवम्ं सफल करने में आपना विशेष सहयोग प्रदान करता है। 
क्योंकि शिक्षा ग्रहण करने में भाषा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।

प्रत्येक क्षेत्र में इसका अत्यंत ही जादा महत्व है। कोई भी राष्ट्र इसके महत्व को नकार कर विकास के मार्ग पर अग्रसर नहीं हो सकता है। 

विश्व में सभी राष्ट्र अपनी-अपनी राष्ट्रभाषा में ही सभी कार्य करते हैं। वह सभी  अपनी भाषा का सम्मान करते हैं। सभी विकसित राष्ट्र आज हमारे समक्ष इसका उदाहरण हैं। 

राष्ट्रभाषा की विशेषताऐं

किसी भी भाषा की अनेकों विशेषताओं हो सकती हैं। किन्तु उसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता उसका राष्ट्रभाषा  होना ही है। 
क्योंकि किसी साधारण भाषा को यह स्थान प्रदान किया ही नहीं जा सकता है।

कुछ अन्य विशेषताऐं

  • समपूर्ण देश में बोली और समझी जाती हो।
  • अधिकतम जनसमूह उसका उपयोग करता हो।
  • जिसके माध्यम से सरलता से विचारों का आदान-प्रदान किया जा सकें।
  • जिसके माध्यम से सरलता से कार्य किया जा सकें
  • जिससे समस्त राष्ट्र में जन कल्याण कारी कार्यों को सरलता से किया जा सके।
  • जिसके माध्यम से किसी संदेश को शीघ्र ही सफलता पूर्वक प्रसारित किया जा सके।
  • जिसके माध्यम से राष्टीय उन्नति को गति प्राप्त हो सके।

राष्ट्रभाषा एवम्ं राजभाषा में अन्तर

राष्ट्र एवम्ं राजभाषा भाषा में मुख्य रुप से इन अन्तरों को देखा जा सकता है।
  • राष्ट्रभाषा का स्वरुप व्यापक होता है।जवकि राजभाषा का प्रारुप सीमित हो सकता है।
  • इसमें प्रयोग किये जा सकते हैं।किन्तु राजभाषा में प्रयोग नहीं किये जा सकते। क्योंकि इसका व्यवहार राजकीय व्यवस्थानुसार निश्चित होता है।
  • इसकी भाषा शैली सरल होती है।राजभाषा की शैली शासकीय होती है।
  • इसको जनसमूह द्वारा सरलता से समझा और बोला जाता है। जबकि राजभाषा के शब्द जटिल होते हैं।
  • इस भाषा का उपयोग अत्यंत ही सरलता से किया जा सकता है।
किन्तु राजभाषा का उपयोग जन  साधारण के माध्यम से सरलता से नहीं किया जा सकता। 

क्योंकि इसकी भाषा शैली में कुछ जटिलता के कारण इसका उपयोग आम बोल चाल के रुप में करना कठिन होता है। 
जो प्रायः बोल चाल के दौरान ना के बराबर ही उपयोग किया जाता है।

या यूं कहें कि जन साधारण को इसे समझना कठिन होता है। इसमें कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग होता है। 

जिन शब्दों का सामान्य जीवन शैली में उपयोग ही नहीं किया जाता। यह शब्द शासकीय व्यवस्था को सुचारु रुप से बनाये रखने के लिए किया जाता है।

अत: इन विशेष गुणों के कारण ही हिन्दी भाषा को हमारी प्रिय भारतीय राष्ट्रभाषा के रुप में स्थापित किया गया है। 
यह हमारे गौरव, संस्कृति एवम्ं प्रकृति  का अनमोल उपहार है। जिस पर हमें गर्व करना चाहिए।