दीपावली कब और कैसे मनाई जाती है

यह उजाले और रौशनी का त्यौहार है। इस उपलक्ष्य में बहुत से दीआ और लाइटें जलाई जाती हैं। आईये यह विस्तृत रुप से समझते हैं कि दीपावली कब और कैसे मनाई जाती है यह कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इसकी तैयारियां लगभग एक माह पूर्व ही आरम्भ होने लगती हैं

घरों और व्यवसयिक प्रतिष्ठानों की साफ सफाई,पुताई और सजावट विशेष रुप से की जाती है। घरों में बहुत सी मिठाईयां एवम्ं पकवान बनाये जाते हैं।  

इस त्यौहार पर लक्ष्मी माता की पूजा अर्चना अत्यंत ही विशेष रुप और महत्व से की जाती है। जिससे जीवन में धन समृद्धि और वैभव सदा सदा के लिए बना रहे


दीपावली क्यों मनाई जाती है

जब भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्री सियाराम लंका में युद्ध के दौरान रावण का वध और विजय प्राप्त कर एवम्ं 14 वर्ष का बनवास बिताकर माता सीता जी को साथ लेकर अयोध्या बापस लौटकर आये

तो खुशी और प्रसन्नता से समस्त अयोध्या वासियों ने सम्पूर्ण नगर में दीआ जलाकर श्री सीतारामजी का स्वागत किया। और बहुत खुशियां और उत्सव मनाया

तभी से निरन्तर समस्त भारतवर्ष के विश्व भर के अनेक देशों में दीयों का यह उत्सव दीपावली मनाई जाती है। 

यह भारतीयों के जीवन में खुशियां और समृद्धि का प्रतीक त्यौहार बन गई है। इसीलिए इसे मनाया जाता है।


दीपावली से पहले और बादके त्यौहार

इससे पहले दो और बाद मे दो त्यौहार मनाये जाते हैं। कुल मिलाकर यह पांच त्यौहारों का समूह रुप है। जैसे कि-

  1. धनतेरस
  2. यम चतुर्दशी
  3. दीपावली
  4. गोवर्धन पूजा
  5. भाईदूज


धनतेरस 

धनतेरस आयुर्वेद के जनक धन्वंतरी को समर्पित त्यौहार है। यह स्वास्थ्य और समृद्धि का उत्सव है।  
इस जीवन के लिए अत्यंत ही शुभ और समृद्धि दायक के रुप में मनाया जाता है। जिससे जीवन सदैव स्वस्थ एवम्ं सुखी बना रहे 


साथ ही इस दिन लोग बाजार से वाहन गाड़ी, घर, नये वस्त्र, वर्तन और सोना चांदी आदि की बहुत सी खरीदारी विशेष रुप से की जाती है। भारतवर्ष में लोगों के जीवन में धनतेरस का अत्याधिक महत्व है

यम चतुर्दशी

यम चतुर्दशी यमराजजी समर्पित उत्सव है। इसमें विशेष रुप से उनकी पूजा अर्चना का भाव समर्पित रहता है। जिससे परिवार के सभी सदस्यों पर उनकी कृपा दृष्टि एवम्ं सुदृष्टि बनी रहे

इसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। सुबह को सूर्य निकलने से पहले स्नान  कर एवम्ं तिल के साथ तीन बार उन्हें जलांजली अर्पण करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। 

जिससे प्राणी को नर्क में नहीं जाना पड़ता। इसी तिथि को श्रीकृष्णा के दर्शन और अराधना करने से उनकी भी अत्यंत ही विशेष कृपा प्राप्त होती है

दीपावली कब, क्यों और कैसे मनाई जाती है
शुभ दीपावली

शाम के समय एक चतुर्मुखी दिआ जला के घर में घुमाकर दरवाजे के पास रखना चाहिए। इसे यम दिआ भी कहा जाता है। साथ ही साथ पितृ पक्ष बिजनेस के बाद इसे पितृलोक के लिए दिआ प्रज्जालित करना भी कहते हैं।

साथ ही इस तिथि को विधि विधान से 
वृत नियम करने और महिलाओं के  
पूर्ण रुप से सजने सबरने से उन्हें जीवन  में सौन्दर्य और सौभाग्य वृद्धि प्राप्त 
होती है। जिससे सुख समृद्धि में वृद्धि होती है

गोवर्धन पूजा

दीपावली के ठीक उगले दिन ही गोवर्धन पूजा का उत्सव मनाया जाताहै। सबसे पहले बृज में श्री कृष्णा के माध्यम से गोकुल वासियों ने गोवर्धन पूजा के रुप में यह उत्सव मनाया
 
जिसे बडे ही हर्षोंउल्लास से मनाया जाता है। जिससे जीवन में धन्य धान्य अनधन के भण्डार सदैव भरे रहें। कभी भी इनकी कमी ना हो। यही इसका विशेष महत्व है

बृज में यह अत्यंत ही उत्साह से मनाया जाता है। वहां इसका बहुत अधिक महत्व है। इसलिए इसे श्री कृष्णा को समर्पित त्यौहार के रुप में मनाया जाता है
श्रीरामजी की कृपा से जब लंका जाने के लिए समुद्र पर सेतु निर्माण कार्य चल रहा था। तो रामदूत श्री हनुमान जी इस पर्वत को निर्माण कार्य के लिए लेजा रहे थे। 

किन्तु इसी समय सेतु निर्माण कार्य समपन्न हो गया। और घोषणा हो गई कि और पत्थर ना लाये जायें। तभी श्री हनुमान जी ने पर्वत को बृज क्षेत्र में ही छोड़ दिया
 
और निर्माण कार्य में उपयोग ना आने के कारण पुनः श्री कृष्णा के रुप में उनकी कृपा प्राप्त होगी। ऐसा आशिर्वाद प्रदान कर सेतु स्थल पर उपस्थित हो गये

भाईदूज

भाईदूज यमराज जी की बहन यमुना जी द्वारा उन्हें अपने यहां बुलाने को कहने पर व्यस्तता के कारण ना आ पाने में असमर्थता व्यक्त की

किन्तु वह मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि को उनसे मिलने पहुंचे जाते हैं। इसी प्रसन्नता कारण यमुना जी उन्हें तिलक कर नारियल भेट करती हैं। और उनके लिए प्राथना करती हैं
 
इसी उपलक्ष्य में दीपावली के साथ अंतिम त्यौहार के रुप में मनाया जाता है। और इसकी के धन समृद्धि और खुशियों का यह त्यौहार बड़ी ही धूम धाम से समपन्न होता है

दीपावली का त्यौहार कैसे मनाया जाता है

कार्तिक माह की अमावस्या के दिन घरों की साफ सफाई कर फूल, तोरण आम के पत्ते, अशोक के पत्ते एवम्ं रंगोली आदि से सजाकर।

ढेरों मिठाईयां और पकवान बनाकर श्री गणेश लक्ष्मीनारायण जी की पूजा अर्चना के साथ ही बडे हर्षोंउल्लास से मनाया जाता है 

साथ ही शाम को सम्पूर्ण घर में दिओं को जलाकर उजाला और रौशनी करते हैं। जिससे यह अमावस्या की घोर अंधेरी रात उजाले से जगमगा जाती है। जिससे सभी ओर रौशनी ही रौशनी हो जाती है

और अपने अपने प्रियजनों को शुभ मंगल कामनाऐं प्रदान करते हैं। जिससे आपस में सहयोग और सदभाव की भावना विकसित होती है। और मिठाईयां खिलाकर एक दूसरे का स्वागत सत्कार जाता है

दीपावली पर आप क्या करते हैं

आज सभी तैयारियां ठीक प्रकार से समपन्न कराकर पूजा अर्चना करके घरों को सजाकर। और साथ ही साथ दिओं को जलाकर अपने माता पिता, सम्मानित जनो एवम्ं बुजुर्गों का शुभ आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

जिससे जीवन में सदैव अखंड सौभाग्य, सफलता और उन्नति को प्राप्त करते 
रहें। और सदैव ही सकारात्मक विचार धारा बनी रहे

दीपावली का महत्व

यह दीपावली का त्यौहार अपने आप में अत्यंत ही विशेष महत्वपूर्ण है। क्योंकि सर्वप्रथम तो यह श्री सीताराम जी के अयोध्या पुनः आगमन की की विशेष  खुशी के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला उत्सव है

साथ ही यह सयुंक्त रुप से पांच त्यौहारों का एक स्वरुप है। जिन्हें अत्यंत ही हर्षों उल्लास से मनाया जाता है। जो बुराई पर अच्छाई का सबसे बड़ा स्वरुप है। 

दीपावली का त्यौहार एक ऊर्जा स्रोत है

जिससे जीवन में प्रत्येक स्थिति का साहस, धैर्य,बुद्धि और सकारात्मकता से सामना करने की प्रेरणा प्राप्त होती रहती  है।  
मानव के लिए यह साक्षात एक ऊर्जा स्रोत है। इसका हमारे जीवन में अत्यंत ही विशेष प्रभावशाली और महत्वपूर्ण स्थान है

जिससे विपरीत परिस्थितियों में भी विचलित ना होने की शिक्षा सदैव ही  प्राप्त होती रहगी। इसलिए जीवन में दीपावली का विशेष महत्व और स्थान है

अत: इसे विस्तृत रुप से पढ़ने और समझने के बाद हम यह पूरी तरह से जान चुके हैं कि दिपावली कब और कैसे मनाई जाती है।